शनिवार, 21 मार्च 2020

कोरोना वायरस जीवों के चयन की प्रक्रिया का हिस्सा मात्र है, इससे डरें नही लड़ें ।


मनुष्य तथा प्रकृति दोनों ही अपने निश्चित लाभ के लिए समय-समय पर जीवों में परिवर्तन लाते रहते है। जिनकी एक निश्चित प्रक्रिया होती है। इसे जीवों के चयन की प्रक्रिया कहते है। जीवों के चयन की प्रक्रिया 2 प्रकार के होते है। आईये इसे विस्तार से समझने का प्रयास करते है।  

(1) कृत्रिम चयन -
-               मनुष्य या वैज्ञानिकों द्वारा अपने इच्छा अनुसार चयनित लक्षणों के अनुरूप जीवों में परिवर्तन लाना कृत्रिम चयन कहलाता है।
                 सरल भाषा में कहें तो मनुष्य द्वारा किसी भी जीव में अपने नीजी लाभ के लिए परिवर्तन लाया जाता है जिसे कृत्रिम चयन कहते है। 
                  मनुष्य द्वारा कृत्रिम चयन की प्रक्रिया में जिन जीवों या उनकी संतान में परिवर्तन चाहते है उनके शरीर के अंदर विशेष प्रकार के रसायन डाल दिया जाता है। जिसके फलस्वरूप उस जीव या उनसे उत्पन्न संतान इच्छित लक्षण वाले पैदा होते है। और यह निरंतरता बनी रहती है।
      कृत्रिम चयन का बहुत से उदाहरण हम देख सकते है। जैसे धान तथा गेंहू की ज्यादा पैदावार देने के लिए बनायी गयी उन्नत किस्म के बीज, ज्यादा दूध देने के लिए बनायी गयी भैंसी या गाय की नयी नस्ल, विशेष रंग रूप को ध्यान में रखकर बनाया गया पालतु कुत्तों की आधुनिक नस्ल। ज्यादा मांस व अंडे देने वाले मूर्गी की नयी नस्ल।विभन्न प्रकार के फल व सब्जियां भी विशेष स्वाद व आकार के लिए इसी प्रक्रिया से बना होता है। आजकल अपने होने वाले बच्चों में विशेष गुणों के लिए भी इस प्रक्रिया को अपनाये जाने लगा है। आपको क्रिश फिल्म की काया तो याद ही होगा।वह भी इसी तरह बनायी गयी थी।
              
      (2)प्राकृतिक चयन -
              प्रकृति भी अपने कुछ लाभ के लिए जीवों का चयन करती है जिसे प्राकृतिक चयन कहते है।
              परंतु प्रकृति द्वारा चयन की प्रक्रिया, कृत्रिम चयन की प्रक्रिया से थोड़ी अलग होती है। प्रकृति अपने लिए एसे श्रेष्ठ जीवों का चयन करती है, जो भविष्य में प्रकृति के अनुसार व्यवहार करते हुए जीवित रह सके। या सबक सीखाकर जीवों में बदलाव लाना चाहती है। जीवों व अपने मध्य संतुलन बनाना चाहती है।
       इसके लिए विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक आपदायें जीवों के सामने लाती है जैसे भयावह बाढ़ का आना, भयानक गर्जना के साथ आसमानी बीजली का गिरना, असमय भूकम्प के झटके लगना, खंडहर में बदल देने वाली तुफान का आना, जंगलों में विकराल आग लगना, लगातार बर्फबारी के साथ मूसलादार बारिश, कड़ाके के साथ हाड़ कपानें वाली ठंड, सूर्य की ऊगलती आग से भी तेज गर्मी, ज्वाला मूखी का भयंकर विस्फोट, या कोई विकराल महामारी, और न जाने क्या क्या।
       इन विकट परिस्थितियों से जो खुद को बचाकर अपने आप को प्रकृति के सामने श्रेष्ठ साबित कर पाते है वही जीव आगे जिंदा रहते है। बाकि सब नष्ट हो जाते है।

          इन्ही विपदाओँ में से एक है कोरोना वायरस जिसके द्वारा हमारी प्रकृति जीवों में परिवर्तन लाना चाहती है। या यूं कहें कोरोना वायरस के माध्यम से जीवों पर कहर बरपाकर देखना चाहती है की कितने जीव इसका सामना कर अपने आप को सुरक्षित रख पाते है। अर्थात कौन-कौन से जीव आगे जीने लायक है। 
     अब तो आप समझ ही गये होंगे कि, कोरोना वायरस आखिर क्यों आया है। हमारे साथ यह पहली बार नही हो रहा है इसलिए हमें डरना नही चाहिए । हमारी प्रकृति हमसे परीक्षा ले रही है। जिसमें हमे पास होना होगा । और साबित करना होगा कि, हम भी प्रकृति के लिए उत्तम जीव है।  
      आपको बताना चाहूंगा कि इस परीक्षा में पास होना बहुत ही आसान है बस कुछ सावधानियाँ आपको अपनानी होगी।जिसके लिए कृपया इस विडयो को क्लिक कर देखें।
 
मुझे यकिन है आप इन सावधानियों को अवश्य अपनायेंगे, और कोरोना वायरस को हरायेंगे।
          लेखन
सी.पी.ढीढी (व्याख्याता)विज्ञान

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